Structural Unemployment - In Hindi !!link!!
एक साल बाद, वही कंपनी जिसने उसे नौकरी से ठुकराया था, अब उसे "टेक्निकल सुपरवाइजर" के पद पर ले गई। बाबूराम अब पुराने बुनकरों को नई मशीनें सिखाता।
यह कहानी है एक छोटे से कस्बे "कोल्हापुरी गेट" की, जो कभी हथकरघा बुनकरों के लिए मशहूर था। यहाँ के लगभग हर घर में करघा था। बाबूराम अपने पिता और दादा की तरह बुनकर था। उसके हाथ रंगों और रेशम के धागों से जादू कर देते थे। structural unemployment in hindi
बाबूराम ने महसूस किया कि उसकी करघे की कला अब "डायनासोर" बन चुकी है - खूबसूरत, पर विलुप्त होती। एक साल बाद
। यह वो बेरोज़गारी है जो तब होती है जब बाजार की मांग बदल जाती है, टेक्नोलॉजी बदल जाती है, लेकिन लोगों के कौशल नहीं बदल पाते। नौकरियाँ हैं, पर उन नौकरियों के लिए लोगों के पास सही स्किल नहीं है। टेक्नोलॉजी बदल जाती है
बाबूराम ने सीखना शुरू किया। उसकी उँगलियाँ, जो कभी रेशम संवारती थीं, अब कीबोर्ड पर चलने लगीं। उसने सीखा कि ऑटो-लूम को कैसे सेट करना है, कैसे डिज़ाइन अपलोड करने हैं।
बाबूराम अक्सर कहता, "हुनर मरता नहीं, बस थोड़ा सा नया रूप ले लेता है। बस उसे पहचानना आता होना चाहिए।"
आज कोल्हापुरी गेट में कोई बेरोज़गार नहीं है। वहाँ अब "हैंडलूम म्यूज़ियम" है - बाबूराम के पुराने करघे के साथ। और साथ में एक मॉडर्न ट्रेनिंग सेंटर, जहाँ बूढ़े बुनकर जवानों को नई टेक्नोलॉजी सिखाते हैं।